दर्द को अल्फ़ाज़ देना आसान नहीं होता। लेकिन शायरी वो ज़बान है जो वो बात कह देती है जो हम ख़ुद नहीं कह पाते। सदियों से शायरों ने अपने दर्द को काग़ज़ पर उतारा है — और उन अल्फ़ाज़ों में हम आज भी अपना अक्स देखते हैं।
इस संग्रह में पेश हैं बेनाम शायरों, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, दुष्यंत कुमार और मीर तक़ी मीर की 50 से ज़्यादा दर्द भरी शायरियाँ — जो सीधे दिल में उतरती हैं। हर शायरी के साथ image card है जिसे आप WhatsApp status और Instagram पर share कर सकते हैं।
दर्द उसको भी था मुझे भी था,
फ़र्क़ सिर्फ़ इतना था —
उसने कह दिया, मैं चुप रह गया।
— Shumaar.com
जो लोग समझते हैं वो बताते नहीं,
जो लोग बताते हैं वो समझते नहीं।
— Shumaar.com
ज़ख़्म वो नहीं जो दिखते हैं,
ज़ख़्म वो हैं जो मुस्कुराते वक़्त भी टीसते हैं।
— Shumaar.com
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो रोने भी नहीं देते,
बस आँखें नम रहती हैं और होंठ मुस्कुराते रहते हैं।
— Shumaar.com
वो शख़्स याद आता है बड़ी शिद्दत से अब भी,
जिसे भूलने की क़सम खाई थी रात भर रो कर।
— Shumaar.com
टूट जाते हैं हम भी अंदर से,
बस जोड़ लेते हैं ख़ुद को किसी के देखने से पहले।
— Shumaar.com
कुछ रिश्ते इतने ख़ामोश टूटते हैं,
कि आवाज़ सालों बाद आती है।
— Shumaar.com
सबसे मुश्किल वो लम्हा होता है,
जब तुम किसी को बताना चाहो और समझ आए कि अब कोई नहीं।
— Shumaar.com
दर्द बड़ा नहीं होता,
इंसान छोटा हो जाता है उसके सामने।
— Shumaar.com
वो ख़ामोशी भी एक जवाब था,
जो मैं समझ नहीं पाया वक़्त पर।
— Shumaar.com
कुछ लोग छोड़ जाते हैं
और कुछ लोग छूट जाते हैं —
दोनों का दर्द अलग होता है।
— Shumaar.com
बिछड़ने का दर्द वो नहीं जो रोते वक़्त होता है,
वो है जब हँसते हँसते
अचानक याद आ जाए कोई।
— Shumaar.com
कुछ याद ऐसी होती हैं जो बुलाने पर नहीं आतीं,
और कुछ ऐसी होती हैं जो
भुलाने पर नहीं जातीं।
— Shumaar.com
उससे दूरी तो हो गई,
पर दिल से उसकी आदत नहीं गई।
— Shumaar.com
वो मिला था बहुत कम वक़्त के लिए,
पर जाते-जाते उम्र भर का दर्द दे गया।
— Shumaar.com
कुछ रिश्ते नाम के नहीं होते,
पर उनका टूटना सबसे ज़्यादा तकलीफ़ देता है।
— Shumaar.com
हर ज़ख़्म भर जाता है वक़्त के साथ,
पर निशान रह जाते हैं — और वो काफ़ी होते हैं याद दिलाने के लिए।
— Shumaar.com
जो बात कल कहनी थी वो आज कहने का वक़्त नहीं,
जो बात आज कहनी है
वो कल तक कोई सुनने वाला नहीं।
— Shumaar.com
वो लम्हे जो गुज़र गए वापस नहीं आते,
पर उनकी याद आती है —
हमेशा बेवक़्त।
— Shumaar.com
कुछ लोग वक़्त से पहले बूढ़े हो जाते हैं,
ग़म ने उन्हें वो उम्र दे दी जो क़िस्मत ने नहीं दी थी।
— Shumaar.com
कुछ दर्द ऐसे पक जाते हैं उम्र के साथ,
जैसे फल पकता है — मीठा लगने लगता है पर असल में सड़ रहा होता है।
— Shumaar.com
रात गई बात गई — ये कहावत झूठी है,
कुछ रातें जाती नहीं, बस आँखें बंद कर लेती हैं।
— Shumaar.com
दर्द को वक़्त नहीं देखना होता,
वो आता है जब आता है —
और ठहरता है जब तक ठहरना हो।
— Shumaar.com
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न माँग,
मैंने समझा था कि तू है तो दरख़्शाँ है हयात।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के,
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौबहार चले,
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब,
आज तुम याद बेहिसाब आए।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी,
तेरे जाँनिसार चले गए।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रात यूँ दिल में तेरी खोई हुई याद आई,
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन कि जहाँ,
चली है रस्म कि कोई न सर उठा के चले।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो,
चश्म-ए-नम जान-ए-शोरीदा काफ़ी नहीं।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम परवरिश-ए-लौह-ओ-क़लम करते रहेंगे,
जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे।
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए,
कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए।
— दुष्यंत कुमार
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
— दुष्यंत कुमार
कौन कहता है कि आसमाँ में सुराख़ नहीं होता,
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो।
— दुष्यंत कुमार
यहाँ तक आते-आते सूख जाती हैं कई नदियाँ,
मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा।
— दुष्यंत कुमार
ग़ज़ब ये है कि अपनी मौत की आहट नहीं सुनते,
वो सब के सब परेशान हैं वो मेरा घर जलाते हैं।
— दुष्यंत कुमार
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
— दुष्यंत कुमार
मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ,
वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ।
— दुष्यंत कुमार
आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख,
घर अँधेरा है तो बाहर रोशनी के क्या मायने।
— दुष्यंत कुमार
मत कहो आकाश में कोहरा घना है,
यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है।
— दुष्यंत कुमार
कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,
गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।
— दुष्यंत कुमार
मुझको शायर न कहो मीर कि साहब मैंने,
दर्द-ए-दिल अपना जो देखा तो शायरी की।
— मीर तक़ी मीर
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है,
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है।
— मीर तक़ी मीर
इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या,
आगे आगे देखिए होता है क्या।
— मीर तक़ी मीर
उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया,
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया।
— मीर तक़ी मीर
दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है,
ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया।
— मीर तक़ी मीर
हस्ती अपनी हुबाब की सी है,
ये नुमाइश सराब की सी है।
— मीर तक़ी मीर
क्या जानूँ लोग कहते हैं क्या मीर साहब को,
अपने तो जो कुछ समझे सो यारों से कह दिया।
— मीर तक़ी मीर
Frequently Asked Questions
What is Dard Bhari Shayari?
Dard Bhari Shayari is Hindi-Urdu poetry that gives words to heartache, separation, loneliness and grief. It speaks for the moments when we cannot express our own pain — and we find our story in someone else’s words.
Who is Dard Bhari Shayari for?
For anyone who is broken on the inside but smiling on the outside. For those who have lost someone, watched a relationship fall apart, or silently endured the difficulties of life without saying a word.
What is the most famous Dard Shayari in Hindi?
Faiz Ahmed Faiz’s “Mujhse Pehli Si Mohabbat Mere Mehboob Na Maang” and Mir Taqi Mir’s “Dil Ki Veerani Ka Kya Mazkoor Hai” are among the most celebrated Dard Bhari Shayari in Hindi-Urdu poetry.
How to share Dard Bhari Shayari on WhatsApp?
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Which poets are featured in this Dard Shayari collection?
This collection features shayari from Faiz Ahmed Faiz, Dushyant Kumar, and Mir Taqi Mir — three of the greatest classical Urdu and Hindi poets — along with a curated selection of anonymous shayaris on love, loss and longing.























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