दर्द को अल्फ़ाज़ देना आसान नहीं होता। लेकिन शायरी वो ज़बान है जो वो बात कह देती है जो हम ख़ुद नहीं कह पाते। सदियों से शायरों ने अपने दर्द को काग़ज़ पर उतारा है — और उन अल्फ़ाज़ों में हम आज भी अपना अक्स देखते हैं।

इस संग्रह में पेश हैं बेनाम शायरों, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, दुष्यंत कुमार और मीर तक़ी मीर की 50 से ज़्यादा दर्द भरी शायरियाँ — जो सीधे दिल में उतरती हैं। हर शायरी के साथ image card है जिसे आप WhatsApp status और Instagram पर share कर सकते हैं।

दर्द भरी शायरी 1 – 10
दर्द उसको भी था मुझे भी था — दर्द भरी शायरी
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दर्द उसको भी था मुझे भी था,
फ़र्क़ सिर्फ़ इतना था —
उसने कह दिया, मैं चुप रह गया।

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जो लोग समझते हैं वो बताते नहीं,
जो लोग बताते हैं वो समझते नहीं।

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ज़ख़्म वो नहीं जो दिखते हैं,
ज़ख़्म वो हैं जो मुस्कुराते वक़्त भी टीसते हैं।

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